शहीद सरबजीत सिंह की कहानी, जीवनी | great Sarabjit Singh Biography in hindi

सरबजीत सिंह का जीवन परिचय

Sarabjit Singh real name सरबजीत सिंह ढीलू
Sarabjit Singh Birthday 1963
Sarabjit Singh Birth placeभिखीविंड गांव, जिला-तरनतारन (पंजाब)
Sarabjit Singh father name सुलक्षण सिंह ढीलू
Sarabjit Singh mother name
Sarabjit Singh sister name दलबीर कौर (Dalbir Kaur)
Sarabjit Singh wife name सुखप्रीत कौर
Sarabjit Singh children/Daughter 2 बेटी – स्वपनदीप, पूनमदीप
Sarabjit Singh death date2 मई 2013
सरबजीत सिंह का फोटो

सरबजीत सिंह (Sarabjeet Singh) जिन्होंने पाकिस्तान के लाहौर के जेल में किसी और का सजा सरबजीत सिंह ने 22 साल गुजारा। पाकिस्तान की सेना को सब सच्चाई पता होने के बावजूद भी सरबजीत सिंह को नहीं छोड़ा और उसको झूटे केस में फंसा दिया। जेल में ही पाकिस्तानी सेना की मदद से कैदियों से ही सरबजीत सिंह को बुरी तरह पीटवा दिया। घायल होने के बाद भी उसका सही से इलाज नहीं करवाना। ये सब चीजों से साफ जाहिर होता है कि बेमतलब की जाने लेना उसका पेशा है इंसानियत क्या होती है बहुत से पाकिस्तानियों को पता ही नहीं है।

पाक का मतलब क्या होता है पता है – पवित्र, निर्दोष, साफ, स्वच्छ लेकिन पाकिस्तान में इसमे से कुछ भी नहीं है। वहाँ के हालात बद से बदतर है आतंकवादी वहाँ ऐसे घूमते हैं जैसे बाजार करने के लिए हटिया आया हो। और हाथ में हथियार लिए हवा में ऐसे लहराते हैं जैसे Olympics में मेडल मिला हो। ओसामा बिन लादेन जैसे कई बड़े आतंकवादी को जिसने पनाह दी हो जुबान पर तमीज नहीं है इंसानियत नाम की चीज से दूर दूर तक वास्ता नहीं है। अपने आप को अनुशासित, भारत से बेहतर और आतंकमुक्त बताता है, पूरी दुनिया पाकिस्तान के मंसूबे से वाकिफ है।

और तो और भारत पे इतने झूटे आरोप लगाते हैं कि जिससे किसी को भी हँसी आ जाएगी, एक तो पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चाइना से कर्ज लिए बैठा है। आतंकवादियों का पाकिस्तान के पास पूरी सरगना है जब अफगानिस्तान पर सोवियत संघ का कठपुतली सरकार थी उसमे पाकिस्तानी आतंकवादी का भी एक अहम रोल था। आज जो तालिबान है वो अमरिका का ही देन है उसने ही अफगानिस्तान के लोगों को कट्टर जिहादी बनाने के लिए पाकिस्तान ट्रेनिंग के लिए भेजे थे। दुनिया बेवक़ूफ़ नहीं है आज के दौर में चाइना मदद कर रहा है तो उसकी कोई मंशा है।

ये तो मैंने थोड़ी बहुत बातें बताई है पाकिस्तान के ऐसे बहुत किस्से है जिसको जानने के बाद आप क्या पाकिस्तान के लोग खुद पाकिस्तान से घृणा करने लगेंगे।

सरबजीत सिंह का जन्म व परिवार

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सरबजीत को पाकिस्तान बॉर्डर के नजदीक पंजाब के तरनतारन जिले के भिखीविंड गांव के रहने वाले थे। सरबजीत सिंह जी के पिताजी का नाम सुलक्षण सिंह ढीलू था। सरबजीत सिंह के पिता सुलक्षण सिंह ढीलू यूपी रोडवेज में काम करते थे, जो सन् 1986 में इनके पिता रिटायर हो गए थे। और उसके बाद जैसे तैसे घर का गुजारा चल रहा था, आर्थिक स्थिति बेहद ही ख़राब हो चुकी थी। थोड़े बहुत चादरों में कढाई करके गुजारा चल रहा था,

सरबजीत को की शादी सुखप्रीत से हुई थी सरबजीत सिंह को बॉडी बिल्डिंग करने का बड़ा शौक था। शादी के बाद सरबजीत सिंह की 2 बेटी हुई बड़ी बेटी का नाम स्वपनदीप जो उस मात्र वक्त 3 साल की थी दूसरी बेटी पूनमदीप थी।

सरबजीत सिंह की पत्नी की फोटो
बाएं स्वपनदीप बीच में मां सुखप्रीत कौर और दायें मे छोटी बेटी पूनमदीप

सरबजीत सिंह की स्टोरी

लेकिन आज मैं सरबजीत के बारे में बताऊँगा जो गलती से नशे की हालत में रात के अंधेरे में कब पाकिस्तान बॉर्डर पार कर गया उसको खुद पता नहीं चला। क्योंकि वो उस वक़्त नशे की हालात में था, रात भी थी और खास बात ये है कि उस समय जो भारत पाकिस्तान के बॉर्डर सीमा था वहाँ पर किसी भी प्रकार की कंटीले तार तक नहीं थे। जिससे रात में अंदाजा लगा पाना मुश्किल था कि कहाँ भारत पाकिस्तान बॉर्डर की लाइन है। जिस वजह से सरबजीत सिंह कब रात के अंधरे में नशे की हालत में पाकिस्तान सीमा पार कर गया उसे भी पता नहीं चला।

सरबजीत सिंह को जब पाकिस्तानी सेना ने पकड़ा

सरबजीत पाकिस्तान के जेल में 22 साल डेथ सेल में बंद रहा, सरबजीत सिंह को बहुत सी यातनाएं दी गई।

सरबजीत सिंह को थोड़ा बहुत शराब पीने की भी आदत थी, 28 अगस्त साल 1990 को नशे की हालत में भारत से पाकिस्तान बॉर्डर पार चला गया। उस वक्त बॉर्डर पर किसी भी तरह की दिवार या कंटीले तार से घिरा हुआ नहीं था, सिर्फ कुछ सीमेंट से टीले बने थे जिसमे पाकिस्तान भारत लिखा हुआ था।

सरबजीत सिंह को 29/30 अगस्त 1990 की रात को पाकिस्तान के सर ज़मी से नशे की हालात में पाकिस्तानी सेना ने गिरफ्तार किया था। उसके बाद उसे जेल में बंद कर दिया गया कुछ वक़्त तक तो सरबजीत सिंह को भी पता नहीं था कि वो कहाँ हैं? सरबजीत सिंह को कोट लखपत सेंट्रल जेल के अंदर मात्र 4 फीट चौड़ा और 6 फीट लम्बे से एक डेथ सेल में बंद करके रखा गया था।

भारत पाकिस्तान बॉर्डर पर किसी तरह कंटीले तार से घिरा न होने के कारण रात में बॉर्डर का अंदाजा लगाना मुश्किल होता था। नशे की हालत में कोई भी गलती कर सकता है तो बॉर्डर पर उस वक्त किसी तरह कंटीले बाड़ न होने के कारण 28 अगस्त 1990 की रात को दोस्त के साथ ज्यादा नशा करने के कारण होश न रहने की वजह से गलती से पाकिस्तान बॉर्डर सीमा पार कर गया और पाकिस्तान के सर जमी पर पहुँच गया। 29/ 30 अगस्त 1990 के बीच की रात को ही पाकिस्तान सेना ने पाकिस्तान के किसी इलाके से सरबजीत सिंह पकड़ा था।

सरबजीत सिंह को किस किस जुर्म में फंसाया

उस वक्त सरबजीत नशे में था कुछ दिन बाद पता चला की वो पाकिस्तान के जेल किसी में बंद है। सरबजीत को झूटे मुक़दमे में लाहौर, मुल्तान, फैसलाबाद में हुए बम धमाके का जिम्मेवार ठहराया गया जिसमे पाकिस्तान के 14 लोगो की मौत हुई थी। शुरू में सरबजीत सिंह को पाकिस्तानी सेना रॉ एजेंट बता कर गिरफ्तार किया था और जबरदस्ती मंजीत सिंह नाम दे दिया। अलग अलग समय में सरबजीत सिंह का नाम कई बार बदल बदल कर उसे दोषी बनाया गया। उस वक्त सरबजीत सिंह की दो बेटी थी स्वपनदीप जो उस मात्र वक्त 3 साल की थी दूसरी बेटी पूनमदीप थी।

जब सरबजीत सिंह को पाकिस्तान की सेना ने गिरफ्तार किया था तब उसने सरबजीत के परिवार वाले को खबर तक नहीं किया था। और न ही वहां के पाकिस्तानी सेना किसी के परिवार से संपर्क करने की इजाजत देते थे बस किसी को उसके घर वालो बगैर पता चले किसी बेगुनहा को उसे आतंकवादी घोषित करके फांसी पर चढ़ा दो। और पाकिस्तान में अपनी वाह वाही लूटो की हमने एक बेगुनहा हिन्दुस्तानी को आतंकवादी बनाकर शूली पर चढ़ा दिया। उसे भूखा नंगा रखना खाने के लिए खाना तक नहीं देना शायद ये सब चीजे उसके मजहब में है और सिखाया भी जाता है।

जब किसी को गिरफ्तार किया जाता है तो उसके बारे में पूरी जानकारी हासिल की जाती है वास्तविक में वो कौन है कहाँ रहता है उसके माँ बाप कौन है वो क्या करता है। आखिर पाकिस्तान सीमा के अन्दर कैसे आया ये तो नशे में हैं, लेकिन सरबजीत सिंह के पकड़ने के बाद ऐसा कुछ भी नही होता है। सीधा जासूस बना दिया जाता है तो कभी आतकवादी जबकि सारा आतंकवादी का डेरा पाकिस्तान के सर जमी पर है। बनते वहीं है पैदा भी वहीं होते है इस चीज को वो कभी भी झुठला नहीं सकता है सच देश के सामने है, अमेरिका ने कैसे घुस के मारा था।

पाकिस्तान में कानून की व्यवस्था बद से बदतर

करीब एक साल के अंदर पाकिस्तान के स्पेशल Terrorist कोर्ट ने 3 अक्टूबर 1991 में ही सरबजीत सिंह को फांसी की सजा सुना दी थी। उस समय सरबजीत सिंह की उम्र 28 साल रही होगी उन्हें पाकिस्तान के कोट लखपत सेंट्रल जेल में मात्र 4 फुट चौड़े और 6 फिट लम्बे डेथ सेल बंद करके रखा गया था। डेथ सेल में रखने का मतलब कि जिन्दा होते हुए भी मुर्दे जैसी हालात हो जाती है। और ऊपर से पाकिस्तान की जेल में एक हिन्दुस्तानी का होना तो आप इसी से अंदाजा लगा सकते है की उसके साथ कैसा व्यवहार किया जाता होगा।

अपनी बेगुनाही को साबित करने के लिए सरबजीत को वकील तक नही दिया गया था, किसी तरह की जांच पड़ताल तक नहीं की गई। बस पाकिस्ततानी सेना ने नकली फाइल बना कर अदालत में जज के सामने पेश किया था और साथ में कुछ पाकिस्तान के ही फर्जी गवाह भी पेश किये थे जो बाद में सच बता भी देते हैं। कोई पुख्ता सबूत तक नही थे सिर्फ पाकिस्तानी सेना के कह देने मात्र जुर्म साबित नही हो सकता है। और वैसा ही अनपढ़ गंवार पाकिस्तान के लोग कि बगैर सच जाने और बगैर किसी के जाने उसके खिलाफ गवाही दे देता है।

बेगुनाह को गुनाह साबित करना सिर्फ पाकिस्तान में ही हो सकता है ये शायद पाकिस्तान के लिए पुन्य का काम माना जाता होगा। जिन्ना ने आखिर किस मकसद से आजादी के समय अलग पाकिस्तान की मांग की थी ये सब देखकर आज एहसास होता है। कि शायद इसलिए एक ऐसा सीमा बनाया कि अगर कोई गलती से भी पाकिस्तान के सर जमी पर आ जाये खासकर गर कोई हिन्दुस्तानी तो उसका खाल उधेड़ देना है मौत से भी बदतर उसका हालत कर देना है। ऐसा लगता है की पाकिस्तान में बच्चे से ही कट्टर हिन्दुस्तानी विरोधी बनाया जाता है।

सरबजीत सिंह की बहन दलबीर कौर और उनके जीजा बलदेव सिंह ने सुप्रिम कोर्ट में सरबजीत सिंह का मुकदमा लड़ने के लिए अपना 45 बीघा जमीन तक बेच दिया लेकिन फायदा कुछ भी नही हुआ। लाहौर हाई कोर्ट में अपील की थी लेकिन साल 2001 में कोर्ट ने सरबजीत सिंह की मौत पर मोहर लगा दी थी तारीख बरक़रार रखी थी।

बाद में सरबजीत का मुकदना लड़ने के लिए बेगुनाही का साबित करने के लिए अब्दुल हामिद रानाको फाइल सौंपा गया था।अब्दुल हामिद राना भी सरबजीत सिंह की बेगुनाही की दलीले लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचे लेकिन बस फांसी की तारीखे बदलती रही और 18 अगस्त 2005 को भी सुप्रीम कोर्ट ने सरबजीत सिंह की मौत की सजा बरकरार रखी।सरबजीत सिंह की रिहाई को लेकर बाद में धीरे धीरे भारत के लोग जागरूक हुए सड़क पर उतरे और साथ में भूख हड़ताल जैसे कई आन्दोलन तक भी किये।

धीरे धीरे सरबजीत एक अब बड़ा मुद्दा बन चुकी थी और कुछ दूसरे देश के भी कुछ मानवाधिकार कमेटी सरबजीत सिंह के बचाव के लिए आगे आ रहे थे।

पाकिस्तान जेल की हालत बद से बदतर

जब से सरबजीत पाकिस्तान जेल में बंद थे तब से सरबजीत सिंह ने बहुत से ख़त अपने घर भेजे। जिनमे से कुछ उसके घर पहुंचते थे तो कुछ पाकिस्तानी सेना कचरे में फेंक देते थे, ये बात सरबजीत सिंह को पता थी। जिस वजह से सरबजीत सिंह बहुत से चिट्टी अपने पास ही संभाल करके रखे थे। एक तो वहां पोस्ट करने कुछ खास सुविधा नहीं थी और न ही सरबजीत सिंह के पास पैसे होते थे की वो किसी से ख़त पोस्ट करवा सके। बहुत से ख़त घर तक किसी तरह घर पहुँचते थे जिसमे सरबजीत सिंह जेल की बदतर हालातों और उस पर हो रहे जुल्म के बारे में बताते थे।

जुलाई 2006 में मुंबई के लोकल ट्रेन में बम धमाका से सरबजीत सिंह के दुसरे पत्र ने घर वालो को हिला कर कर रख दिया था। क्योंकि यहाँ हुए बम धमाकों से वहां पाकिस्तान में सरबजीत सिंह के मुक़दमे में भी असर पड़ा था, क्योंकि वहां की सोच ही ऐसी है।

सरबजीत ने कई ख़त लिखे जिसको वो संभाल कर रखा करते थे क्योंकि पाकिस्तानी सेना इसकी इजाजत नहीं देते थे। ऐसी क्रूरता भला कौन करता है पूरी दुनिया में कोई नहीं करता है। भेजने के साधन नहीं के कारण पत्र जेल के अधिकारीयों को देने पर वो शायद कचरे में फेंक दे इतना दुःख भरी कहानी बताते है कि मेरे खिलाफ इन लोगो नें पूरी तैयारी कर रखी है। इन लोगो ने मेरे खिलाफ झूटे गवाह तक है बना रखे हैं। चूँकि बाद में वो गवाह सच भी बता देते हैं लेकिन बावजूद इसके सरबजीत सिंह को नहीं छोड़ा गया था।

सरबजीत कहते हैं जेल हालत बहुत बद से बदतर है मैं यहाँ अच्छा से नहीं हूँ जीजी आप कुछ ऐसा करे की मेरे ऊपर से थोड़ा सख्ती कम किया जाये। इसके लिए आप मुख्यमंत्री से बात करो मुझे दिमागी तौर से बहुत परेशान किया जा रहा है, सफाई कर्मचारियों से गालियाँ दिलवाते हैं। मेरी आँखों से भी अब कम दिखने लगा है यहाँ किसी भी चीज का इलाज तक नहीं करवाते हैं ये लोग, खाने तक के लिए सही से खाना तक नहीं देते है।

सरबजीत सिंह की दया याचिका का क्या होता है?

तत्कालीन वहां के राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ़ ने सरबजीत सिंह की पहली दया याचिका ख़ारिज कर दी थी।

और उसके बाद 1 अप्रैल 2008 को सरबजीत सिंह की फांसी की तारीख मुक़र्रर की गई थी, 19 मार्च 2008 को उस वक्त के भारत के विदेश मंत्री प्रणव मुखर्जी सदन में बताया की सरबजीत सिंह की फांसी टाल दी गई है। और 30 अप्रैल तक 2008 तक सरबजीत सिंह की फांसी पर रोक लगा दी गई है। उसके बाद पाकिस्तान में सरकार बदल गई और नए प्रधानमंत्री के रूप में युसूफ रजा गिलानी आये जिससे सरबजीत सिंह की फांसी टल गई। लेकिन रिहाई को लेकर कोई भी बयान नहीं आया था एक बार उस समय के पाकिस्तान के मानवाधिकार कमेटी के मंत्री सबूत तलाशने भारत दौरे पर आये थे।

लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ 2008 में पहली बार सरबजीत सिंह के परिवार वाले पाकिस्तान के कोट लखपत जेल में जाकर सरबजीत से मुलाकात की। और कुछ महीने बाद ही देश में आतंकवादी हमला हुआ 26 नवम्बर 2008 को जिसका संबंध पाकिस्तान से जुड़ा बताया उसके बाद से सरबजीत सिंह की रिहाई पर पूरी तरह से पाकिस्तानी सरकार ने चुप्पी ही साध ली थी।

बीच में कई दफा सरबजीत सिंह छुटने की उम्मीदे बनी लेकिन फिर टूट गई, 19 साल की सजा काटने के बाद सुप्रिम कोर्ट में पुन: विचार याचिका दाखिल की गई लेकिन सरबजीत सिंह की किस्मत ही ख़राब थी जिस तारीख की सुनवाई होनी थी उस तारीख को सरबजीत सिंह का वकील राणा अब्दुल हामिद कोर्ट ही नहीं पहुँच पाता है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति के पास सरबजीत सिंह के 5 दया याचिका भेजी गई जिसमे से 4 ख़ारिज गई और 5वीं दया याचिका 28 मई 2012 को भेजी गई थी। उसके बाद भी इस मुक़दमे में किसी तरह की सुनवाई नहीं हुई।

जब पाकिस्तान से सरबजीत सिंह की झूटी रिहाई की खबर आई

मतलब देखा जाये तो पाकिस्तान में सरबजीत सिंह के केस को लेकर किसी को जरा सा भी दिलचस्पी नहीं थी। वहां पर हर कोई इतना लापरवाह था कि जिसका जिक्र करने में मुझे शर्म आती है कि आखिर कोई देश इतना बेहरहम कैसे ही सकता है। वहां पर सरबजीत सिंह के खिलाफ हर किसी को दिल में इतनी नफरत पैदा कर दी थी कि किसी में इंसानियत नाम की चीज बची है नही थी। 5वीं दया याचिका भेजने के करीब एक महीने के बाद अचानक 26 जून 2012 को पाकिस्तानी मीडिया से सरबजीत सिंह की रिहाई की खबर आई थी।

जिससे पुरे गाँव में खुशी का माहौल था घर वाले भी बेहद खुश थे लेकिन ये खबर झूट निकली थी सरबजीत सिंह की जगह सुरजीत सिंह की रिहाई हुई। जो पाकिस्तान के ही जेल में बंद था जिससे घर में जो खुशी का माहौल था पल भर में सब खत्म हो गया था।

26/11 के गुनेहगार कसाब को जिसको रंगे हाथ पकड़ा था कुछ रिपोर्ट के मुताबिक उसके बदले सरबजीत सिंह को छोड़ सकता था। लेकिन यहाँ पर सरबजीत सिंह के घर वाले ने कहा की जब ऐसी बात होगी तो उसकी बेटी ने कहा कि ऐसे बड़े आतंकवादी की खातिर हम अपने पिता की कुरबानी दे देंगे लेकिन इतने खतरनाक आतंकवादी के लिए बिलकुल भी रिहाई की अपील नहीं करेंगे। कसाब को आख़िरकार 21 नवम्बर 2012 को भारत में फांसी दे दी गई उसके बाद ये सवाल खड़े होने लगे की क्या अब सरबजीत सिंह पाकिस्तान के जेल से रिहाई मिलेगी।

जब सरबजीत सिंह को जेल में बुरी तरह पिटा

26 अप्रैल 2013 को पाकिस्तान के मिडिया से एक खबर आई कि पाकिस्तान के जिन्ना अस्पताल में सरबजीत सिंह को जख्मी हालत में भर्ती कराया गया है। हालात बेहद ही नाजुक बताया गया था सिर पर बहुत गहरी चोटें थी उनको बुरी तरह जेल में ही जेल के कैदियों के द्वारा पाकिस्तानी जेल के जेलर द्वारा सोची समझी एक प्लान के तहत उसको पिटवाया गया था। उसके बाद उसके परिवार वाले मिलने के लिए पाकिस्तान के जिन्ना अस्पताल गए और उसकी बेटी ने अपने पिता की हालात देखी और बयाँ भी की है उसके बाद भी सरबजीत सिंह की रिहाई की गुहार लगाई गई।

सरबजीत सिंह की बेटी की  फोटो
जब पूनमदीप अपने पिता सरबजीत सिंह जिन्ना आस्पताल में मिली थी दर्द बयाँ करती हुई

उसी पाकिस्तान जेल के हमलावर जिसने जेल में ही सरबजीत सिंह पर हमला किया था आमिर आफताब और मुदासिर के खिलाफ मामला तो दर्ज कर लिया गया था आगे किया हुआ बाद में क्या हुआ वो पाकिस्तान ही जानता है और चार जेल अधिकारीयों को ससपेंड भी किया गया था।

जब परिवार वाले सरबजीत सिंह मिलने के लिए गए थे तब क्या हुआ? 15 दिन का वीजा था लेकिन उसके घर वाले मात्र 3 दिन में भारत लौट आये। जब सरबजीत सिंह के घर वाले पाकिस्तान के जिन्ना आस्पताल में सरबजीत सिंह से मिलने गए तो उनकी हालात बेहद ही नाजुक थी। सरबजीत सिंह के पत्नी ने कहा की देखो तुमसे मिलने के लिए तुम्हारी बच्चियां आई है तो सरबजीत सिंह ने अपने हाथ हिलाए थे उसका हाथ दो दफा बेड से नीचे भी गिरा था वो बोलने की परिस्थिति में नहीं थे एक रिपोर्ट के मुताबिक शायद सरबजीत सिंह कोमा में थे।

सरबजीत सिंह की बेटी ने बताया की जब वो अपने पिता को छूकर देखा था उसका शरीर गर्म था स्थिति भी बेहद ही क्रिटिकल थी। उनके में शरीर में हलचल थी सिर पर बहुत ही गहरी चोटें थी जिसपर अच्छे से पट्टी भी नही की गई थी और शरीर के बाकि हिस्से पर भी चोटें थी। बेटी ने बताया की जिस वक्त इनको सुरक्षा की जरुरत थी उस पाकिस्तानी सरकार ने दी नहीं और जब उनकी हालत नाजुक है तो पाकिस्तान सरकार दिखावा करने में लगी है। इन लोगो का 15 दिन का वीजा होने के बावजूद भी ये लोग मात्र 3 तीन में ही वापस हिन्दुस्तान लौट आये।

सरबजीत सिंह के केस को लेकर पाकिस्तान में परिस्थितियां बहुत ही ख़राब थी जिसके कारण उसके घर वाले को 3 में ही लौटना पद गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरबजीत सिंह के परिवार के नाम कुछ फतवा जारी हो गया था वहां लोकल गुंडा कहे या आतंकवादी कुछ फर्क नहीं पड़नेवाला उसने उसके परिवार को भारत लौटने का हुक्म दिया नहीं टी उस पर भी हमला हो सकता है। यहाँ पर भी पाकिस्तानी सरकार कुछ नहीं कर पाती है जिस वजह से लौटन गए, ICU में उसको 3 से 4 मिनट से ज्यादा नहीं रहने देते थे।

सरबजीत सिंह पाकिस्तान के जिन्ना अस्पताल में 26 अप्रैल 2013 से ही भर्ती था और रिपोर्ट की माने तो सरबजीत सिंह डीप कोमा चले गए थे।

वहां सब को पता था अब वैसे भी ये ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहने वाले क्योंकि हमला भी तो उन लोगो की एक साजिश की तहत ही की गई थी।

और आख़िरकार सरबजीत सिंह 23 साल बस एक लम्बा सफ़र तय करके 2 मई 2013 को भारत लौटा लेकिन सिर्फ सरबजीत सिंह का शरीर ही आ पाया था। उनकी आत्मा को जल्लाद पाकिस्तानियों ने यातनाये दे दे कर निकाल ली, जिसको एक दिन उसको उसके किये की सजा जरुर मिलेगी, और मिलनी भी चाहिए।

2 मई 2013 की रात के करीब सवा एक बजे पाकिस्तान के जिन्ना आस्पताल में सरबजीत सिंह आखिरी सांस लेते है और पाकिस्तान के ही जिन्ना अस्पताल में उनकी मृत्यु गई। करीब शाम 7:50 पे इंडियन एयर लाइन्स के द्वारा सरबजीत सिंह का मृत शरीर लाहौर से अमृतसर पहुंचा था। और उसके बाद करीब 9:20 पे उसका शरीर हेलिकप्टर से अमृतसर से भिखीविंड पहुंचा और उसके बाद फिर करीब 9:40 पे सरबजीत सिंह का बॉडी post-mortem के लिए ले जाया गया।

फिर अगले दिन 3 मई 2013 को सरबजीत सिंह अंतिम संस्कार की तैयारी की जाती है जिसमे बड़े बड़े नेता भी शामिल थे। साथ में हजारो लोगो की भीड़ थी हर तरफ लोग ही थे सब आँखे नाम थी हर तरफ एक ही नारा था सरबजीत सिंह अमर रहे और पाकिस्तान मुर्दाबाद, पाकिस्तान मुर्दाबाद ये होना भी चाहिए था। लेकिन इससे पाकिस्तानी सरकार को फर्क नहीं पड़ने वाला था, क्योंकि वहां तो आधे से ज्यादा सब आतंकवादी होते है सब का ब्रेन वाश किया होता है उसको क्या आम इमली समझ में आएगा।

सरबजीत सिंह की अंतिम बिदाई होती है सरबजीत सिंह को मुखाग्नि उसकी बहन दलबीर कौर ही देती है। अंतिम संस्कार में राहुल गाँधी भी शामिल हुए थे और इस तरह 23 साल के बाद सरबजीत सिंह एक छोटी सी गलती से पाकिस्तान बॉर्डर चला गया था वो वापस तो आया लेकिन आने के बाद वो हमेशा के लिए पंचतत्व में मिल गए। सरबजीत सिंह के साथ जिस तरह से पाकिस्तानी ने किया है उसके बदनामी के चर्चे हर युग में होगा।

भारत सरकार ने सरबजीत सिंह के लिए क्या किया?

पाकिस्तान के वकील के हाथ से जब सरबजीत सिंह की एक चिट्टी आई थी तब उसकी बेटी वो चिट्टी लेकर भारत के गृह मंत्रालय ले के गई थी। तो यहाँ पर भी भारत सरकार ने किसी तरह का ठोस कदम नहीं उठाया बस उसको तसल्ली देने के मकसद से कह दिया किया हमलोग पूरी कोशिश कर रहे हैं। और यहाँ गृह मंत्रालय ने क्या कहा ये जानकर आपको हैरानी होगी गृह मंत्रालय ने कहा इन सब चीजो को मीडिया में नहीं बताना इसका जिक्र भी नही करना क्योंकि हमलोग खुद पाकिस्तान सरकार से बात कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर हम बात कर रहे हैं।

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