Corona Vaccine kab tak aayegi

कोरोना वैक्सीन कब आएगी और कीमत क्या होगी ?

वैक्सीन बनाने में कितना समय लगेगा या लग सकता है – 

एक तरफ़ देखा जाए तो कोरोना वायरस का वैक्सीन विकसित करने में कई देश लगे हुए हैं। लगभग सैकड़ों लैबोरेट्री में इस पर रिसर्च भी चल रही है कुछ संस्थाओं का कहना है कि वैक्सीन बनाने में लघभग 18 महीना लग सकता है और कुछ का कहना है उससे ज्यादा समय भी लग सकता है। वैक्सीन बनाने की जो प्रक्रिया है वह बहुत ही जटिल होती है। 

लेकिन देखा जाये तो वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी सबसे आगे चल रही है लेकिन कुछ कारणवश फेस 3 में जो ट्रायल चल रही थी वो रुक गई कारण ये था की जिस इन्सान पर ट्रायल चल रही थी उसमे कुछ साइड इफ़ेक्ट देखने को मिला जिसके कारण बीच में ही ट्रायल को रोकना पड़ा, 

लेकिन बहुत ही जल्द फिर से ट्रायल शुरू की जाएगी ऐसा ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से बयान आया है 
  • WHO (वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन) के एमरजेंसी एक्सपर्ट माइक रायन ने एक मिटिंग के दौरान में कहा है कि एचआईवी ( HIV) की तरह कोरोना वायरस भी पृथ्वी पर ही रह ना जाए कभी खत्म ही ना हो पाए। ऐसा ना हो कि इस वायरस से समझौता कर जीना पड़ जाए। मुझे नहीं लगता है कि कोई भी अनुमान लगा सकता है कि ये वायरस आख़िर कब तक ख़त्म किया जा सकता है, इस वायरस को फ़िलहाल नष्ट करने की कोशिश अवश्य किया जा सकता है। और बात रही वैक्सीन की तो उसके लिए बहुत ही असरदार वैक्सीन बनाने की आवश्यकता पड़ेगी। ब्रिटेन सरकार का भी कुछ ऐसा ही कहना है।

वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया क्या होती है – 

वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया बहुत ही लंबी होती है ग़र पुराने इतिहास को देखा जाए तो सबसे कम समय जो लगा था वैक्सीन बनाने में वो चार साल था, ये सुन के कुछ चौक गए होंगे कुछ को मालूम ही होगा, कुछ की नजर में ये बहुत ज्यादा समय लग रहा होगा लेकिन यही हक़ीक़त है और सच भी यही है। 

वैक्सीन बनाने के लिए सबसे पहले सैंपल एकत्रित किया जाता है उसकी गहन बारीकी से अध्ययन की जाती है। वायरस इतना सूक्ष्म होता है कि उसे नग्न आंखों से देखना संभव नहीं होता है। उसे सूक्ष्मदर्शी यंत्र से देखा जा सकता है। और भी नए डिजिटल उपकरण आए हैं जिसकी सहायता से वायरस को आसानी से देखी जा सकती है वायरस का अध्ययन सूक्ष्मदर्शी यंत्र और अन्य उपकरणों से की जाती है। 

वायरस बहुत से चीजों से मिलकर बनी होती है जिसे डॉक्टर पता करते हैं उसमें ख़ासकर प्रोटीन्स, RNA, DNA आदि पदार्थे होती है, जिसके जांच उपरांत ही उसकी वैक्सीन बनाने की तैयारी की जाती है, और वैक्सीन भी अलग अलग डॉज में तैयार की जाती है अलग अलग आयु वर्ग के उम्र के लोगों के लिए अलग अलग डॉज की वैक्सीन तैयार की जाती है, क्योंकि एक ही प्रकार का डोज वाला वैक्सीन सभी उम्र के लोगों पर काम नहीं करती I 

एक ही मात्रा में डोज बनाने और इस्तेमाल करने पर इससे शरीर पर साइड इफेक्ट हो सकते हैं। किसी तरह का नुक़सान हो सकता है। क्योंकि उम्र बीतने के साथ साथ हर वर्ग के उम्र के लोगों के शरीर में वायरस और छोटे मोटे वायरल इन्फेक्शन से लड़ने की शक्ति या क्षमता ख़त्म हो जाती है जिसकी वजह से उसका शरीर कमज़ोर पड़ जाती है। 

उसका इम्यून सिस्टम यानी प्रतिरक्षा तंत्र कमज़ोर पड़ जाती है और वह छोटे मोटे वायरल इन्फेक्शन का शिकार बहुत ही असानी से हो जाते हैं। और उसके ऊपर दवाई भी बहुत देर से काम करती है, या कभी कभी बेअसर भी हो जाती है।

वैक्सीन का तैयार होने के बाद उसका उपयोग कहाँ किया जाता है – 

वैक्सीन बनने के बाद सबसे पहले जानवरों पर प्रयोग किया जाता है जिसमें कई महीने लग जाते और बहुत बार ऐसा भी हुआ ही की चार पांच प्रयासों में भी सफ़लता नहीं मिलती जिसके कारण आज भी बहुत से वायरस का वैक्सीन विकसित नहीं हो पायी है वो सारा वैक्सीन की खोज की प्रक्रिया आज भी चल रही है। ऐसा ना हो कि कोरोना वायरस भी इसी में गिनती आ जाए लेकिन ऐसा कोई नहीं चाहता और होना भी नहीं चाहिए क्योंकि ये कोरोना वायरस आज की तारीख और बदलती दुनिया के हिसाब से इस पे काबु पाना बहुत ही जरूरी है नहीं तो धीरे धीरे ये दुनिया को अपने कब्जे में ले लेगी किसी को ख़बर भी नहीं लगेगी। 

बात रही वैक्सीन की तो ऐसा कई बार हुआ जब वैक्सीन बन तो गई पर प्रयोग के दौरान उसका कुछ असर नहीं हुआ और कभी कभी साइड इफेक्ट कर जाता था, इसलिए बहुत बारीकियों से वैक्सीन तैयार की जाती है। कि जिससे किसी तरह का साइड इफेक्ट न हो। इसमे में भी कई महीने कभी कभी साल भी लग जाते हैं।

जब वैक्सीन जानवरों पर काम कर जाती है तो अब पारी आती है इंसानो पर जिसमें कुछ स्वस्थ लोगों की जरूरत पड़ती है जिसमें सबसे पहले वायरस का हल्का डॉज उसके शरीर में प्रवेश किया जाता है और उसके बाद वैक्सीन का डोज दिया जाता है। इसमे में भी कई महीने लग जाते हैं। वैक्सीन के प्रयोग से भविष्य में किसी भी तरह का कोई साइड इफेक्ट न हो इसकी पूरी जांच पड़ताल के बाद ही कुछ सोचा जा सकता है। 

इसके बाद आता है इसे पास करने की इस पे मुहर लगाने की जब WHO ( वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन) के द्वारा पास किया जाता है इसमे भी लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। जब तक ये भी संतुष्ट नहीं हो जाते इसे वितरण नहीं किया जा सकता है। एक बार ऐसा भी हुआ जब किसी वैक्सीन को पास कर दिया और उसके बाद उसके साइड इफेक्ट आने शुरू हो गए थे। 

वो था डेंगू का वैक्सीन जब डेंगू 2015 के आसपास फैला था उसी बीच इसका वैक्सीन तैयार की गई थी, जब वैक्सीन को पास कर दिया गया था तब उसके ईस्तेमाल से डेंगू से संक्रमित लोगों की हालात और भी गंभीर हो गई थी। कुछ साइड इफेक्ट आने लगे थे। उसके बाद से कोई असरदार वैक्सीन अभी तक नही बनी है। 

किस किस बीमारी का वैक्सीन अभी तक नहीं बनी है – 

  • एचआईवीएचआईवी (HIV) की वैक्सीन करीब बीस सालों से पेंडिंग में यानी कि वैक्सीन बनाने पर शोध चल रहा है। अभी तक एचआईवी की वैक्सीन नही बन पाई है। इस 20 वर्षो के दौरान करीब एचआईवी (HIV) से 3 करोड़ लोग जान गंवा चुके हैं अभी तक और अभी भी बहुत से लोग संंक्रमित हैैं।
  • मलेरिया – बात करे मलेरिया की तो अभी तक सफ़लतापूर्वक वैक्सीन अभी तक नहीं बन पाई है और इसकी वैक्सीन पर अभी भी रिसर्च/शोध चल रही है। इससे हर साल करीब दुनिया भर में 50 करोड़ लोग हर साल संक्रमित होते हैं और 30 लाख के आसपास लोग हर साल मर जाते हैं। इससे बचने के लिए लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाइयां लेनी पड़ती है। 
  • डेंगू – अभी तक डेंगू का भी सफल वैक्सीन नहीं बन पाई है। जिसके कारण हर साल करीब दुनिया भर में 60 से 90 लाख लोग डेंगू से संक्रमित होते हैं। डेंगू की एक वैक्सीन तैयार तो को गई थी लेकिन उसके इस्तेमाल से लोगों साइड इफेक्ट आने लगे थे जिससे संक्रमित लोगो की हालात और भी गंभीर हो जाती थी बाद में इस वैक्सीन को बंद कर दिया गया खारिज कर दी गई। इसके बाद से अभी तक इसका वैक्सीन नहीं बना है I 
  • सार्स – बात करे सार्स की तो 2003 के आसपास चाइना से ही शुरुआत हुई थी समझो वहीं से ही निकली थी। और अभी तक इसका वैक्सीन नहीं बना पाई है और आज करीब 17 साल बीत चुकी है। 
  • चिकनगुनिया – इसकी भी अभी तक कोई सफल वैक्सीन/टीका अभी तक नहीं बन पाई है। 

इबोला वैक्सीन बनाने में कितना समय लगा – 

  • इबोला वायरस – इसे बनाने में लघभग 4 साल लगा, जो कि अभी तक का सबसे कम समय लगा था।
  • अब ये देखना है कि कोरोना वायरस का वैक्सीन आखिर कब तक तैयार होती है, नवंबर दिसंबर 2019 से लेकर अब तक लगभग 6 महीना बीत चुका है कोरोना वायरस का कहर मचाये। 
  • कुछ वैज्ञानिकों शोधकर्ताओं ने 18 महीने लेकर चल रहे हैं इसके बीच ग़र तैयार कर देते हैं तो ये एक बड़ी सफलता होगी
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