द्रौपदी मुर्मू का जीवनी | Draupadi Murmu Biography in Hindi

द्रौपदी मुर्मू का जीवन परिचय : Draupadi Murmu Biography in Hindi

Draupadi Murmu real name द्रौपदी मुर्मू
Draupadi Murmu birthday20 जून सन् 1958
Draupadi Murmu birth placeउड़ीसा के मयूरभंज जिले में
Draupadi Murmu age64 साल (2022)
Draupadi Murmu father’s nameबिरंची नारायण टुडू
Draupadi Murmu mother’s nameतारिणीसेन तुडु,
Draupadi Murmu brother’s 2 –
Draupadi Murmu education B.A. ग्रेजुएशन
Draupadi Murmu school name
Draupadi Murmu collage nameरामा देवी वूमेंस कॉलेज ( Rama Devi Women’s Collage)
Draupadi Murmu husband’s name श्यामचरण मुर्मू
Draupadi Murmu childrens3 – दो बेटे और एक बेटी
Draupadi Murmu son’s name2 – रामचन्द्र मुर्मू, लक्ष्मण मुर्मू
Draupadi Murmu daughter’s name1- इतिश्री मुर्मू
Draupadi Murmu Occupation क्लर्क, शिक्षका अभी राष्ट्रपति है (25 जुलाई 2022 को सपथ)

द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) जी भारत देश की पहली आदिवासी समुदाय संथाल से राष्ट्रपति बनने वाली महिला है। खास बात ये भी है कि झारखण्ड की पहली महिला राज्यपाल भी रह चुकी हैं। इनका जीवन इतना संघर्ष रहा है जिसके बारे मे जानकर आपकी आंखों में भी आंसू आ जायेंगे। एक एक करके इनके दो बेटो का आकस्मिक निधन हो गया इतना ही नही उसके बाद इनके पति श्यामलाल मुर्मू की भी मौत हो गई ये सब होने के बाद इंसान लगभग जीना छोड़ देते हैं, कुछ समय तक द्रौपदी मुर्मू जी अवसाद (डिप्रेशन) में जरुर रहे लेकिन इन्होंने खुद को किसी तरह संभाला और धीरे धीरे अपने आप को डिप्रेशन से निकाला।

द्रौपदी मुर्मू (Draupadi Murmu) जी मूल रूप से उड़ीसा के मयूरभंज जिले की रहने वाली है।

Draupadi Murmu photo

द्रौपदी मुर्मू का जन्म, परिवार व शिक्षा ( Draupadi Murmu birth & family)

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द्रौपदी मुर्मू जी का जन्म 20 जून सन् 1958 को उड़ीसा के मयूरभंज जिले में के आदिवासी समुदाय में संथाल परिवार में हुआ। इनके पिता जी का नाम बिरंची नारायण टुडू है, जो एक समय अपने गांव के सरपंच भी रह चुके हैं और साथ में इनके पिताजी यानि द्रौपदी मुर्मू जी के दादा जी भी गांव के सरपंच रह चुके हैं। द्रौपदी मुर्मू की प्रारंभिक पढ़ाई लिखाई पैतृक गांव से हुई, उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए भुनेश्वर चली गई। वहां जाकर रामा देवी वूमेंस कॉलेज ( Rama Devi Women’s Collage) में दाखिला लिया और वहीं से 1979 मे ग्रेजुएशन भी पूरी की। ये 3 भाई बहन है जिनमे इनके दो भाई और ये अकेली एक बहन थी।

उनके भतीजे कि पत्नी का नाम दुलारी मुर्मू है, द्रौपदी मुर्मू जी गांव की भी पहली ऐसी लड़की थी जो अपने गांव और घर से दूर रहकर ग्रेजुएशन पूरी की, मतलब की इन्होंने हर जगह प्रथम स्थान ही अभी तक पाया है।

जब द्रौपदी मुर्मू जी पढ़ने के लिए गांव से बाहर गई कॉलेज में इनकी मुलाकात श्यामचरण मुर्मू से हुई थी। दोनो एक दूसरे से मिलने लगे धीरे धीरे दोनो में प्यार हुआ और आगे चलकर दोनो शादी कर ली। कुछ सालों के बाद इनके दो बेटे और एक बेटी हुईं, बेटी का नाम इतिश्री है जो बैंक में काम करती हैं। इनके बेटे का साल 2009 में आकस्मिक निधन हो गया जिससे द्रौपदी मुर्मू जी डिप्रेशन में चली गई अभी इस दुःख से बाहर भी नही निकली थीं की साल 2013 में इनके दूसरे पुत्र का भी असमय और आकस्मिक निधन हो गया।

द्रौपदी मुर्मू जी को बहुत बड़ा धक्का लगा इसके बाद अगले साल द्रौपदी मुर्मू जी के पति श्यामचरण मुर्मू की भी मौत हो गई। आखिर इनके साथ ऐसा क्यों हो रहा था ये सिर्फ़ उपर वाले को ही पता था। द्रौपदी मुर्मू जी के बेटी इतिश्री के पति यानी इनके दामाद का नाम गणेश हेंब्रम है इनकी बेटी उड़ीसा के ही एक बैंक में जॉब करती हैं। द्रौपदी मुर्मू जी ने अपने घर को स्कूल मे तब्दील कर दिया, अपनी संपत्ति तक दान कर दी।

पिता के विरुद्ध जाकर प्रेम विवाह किया

द्रौपदी मुर्मू जी की शादी साल 1980 में श्यामचरण मुर्मू से प्रेम विवाह शादी की। इनके समुदाय में यानी संथाल समुदाय में दहेज देने का रिवाज उल्टा होता है यानी की लगभग हर किसी को पता है की दहेज हमेशा लड़की पक्ष वाले ही देते हैं लेकिन इस केस में यानी द्रौपदी मुर्मू जी के शादी में दहेज द्रौपदी मुर्मू जी को ही मिली। इनके पति श्यामचरण मुर्मू जी उसी गाँव के पहाड़पुर के रहने वाले थे, इनके समुदाय में प्रेम विवाह चलता है लेकिन इनके पिता शुरू में प्रेम विवाह से मना कर दिया लेकिन बावजूद पिता के विरुद्ध जाकर प्रेम विवाह किया।

द्रौपदी मुर्मू जी ने साल 1979 से लेकर साल 1983 तक ही नौकरी की, उसके बाद रायरंगपुर में मौजूद अरबिंदो इंटीग्रल एजुकेशन सेंटर में टीचर के रूप में काम किया, 1994 से लेकर 1997 तक शिक्षक के रुप में काम किया। द्रौपदी मुर्मू जी की पहली नौकरी उड़ीसा के सिंचाई विभाग में क्लर्क कि नौकरी कि उसके बाद अपने गृह जिले में एक कॉलेज में असिस्टन्ट प्रोफेसर रही और वहाँ पढ़ाया।

द्रौपदी मुर्मू का जीवन सफर और राजनीतिक कैरियर

पढ़ाई पूरी करने के बाद द्रौपदी मुर्मू ( Draupadi Murmu) जी ने सिंचाई और बिजली विभागों में क्लर्क पद की नौकरी तक की। कुछ सालो तक इन्होंने जॉब तो किया फिर उसके बाद जॉब इन्होने छोड़ दी, उसके बाद द्रौपदी मुर्मू ने अपना रुख राजनीतिक की तरफ मोड़ लिया। कुछ सालो के बाद 1997 में द्रौपदी मुर्मू जी मयूरभंज के रंगरायपुर वार्ड पार्षद के चुनाव में खड़े हुए और बकायदा जीती भी, फिर कुछ सालो में उड़ीसा सरकार में मंत्री पद मिला। द्रौपदी मुर्मू जी लगातार कई अलग अलग चुनावों में खड़ा हुए और जीती भी, साल 2015 में द्रौपदी मुर्मू जी झारखंड की पहली महिला राज्यपाल बनी।

झारखण्ड विभाजन के बाद कोई राज्यपाल पद पर 5 साल रही और पहली महिला झारखण्ड राज्य की राज्यपाल बनी, उड़ीसा से 2 बार विधायक भी रही। और साल 2000 से लेकर 2004 तक उड़ीसा सरकार में राजमंत्री भी रही, उसके बाद साल 2015 में द्रौपदी मुर्मू जी को झारखंड का राज्यपाल बनाया गया। उस वक्त द्रौपदी मुर्मू जी राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द से मिलने गई थी, उस वक्त उनको भी एहसास नहीं था कि वो एक दिन उसी कुर्सी पर बैठेगी जो उस वक्त उस कुर्सी पर रामनाथ कोविन्द जी विराजमन थे।

साल 2017 में जब झारखंड में बीजेपी कि सरकार थी रघुवर दास जी जब झारखंड के मुख्यमंत्री थे तब द्रौपदी मुर्मू जी ने के CNT Act और SPT Act में कुछ संशोधन किये थे जिसमे ये कानून आदिवासी समुदाय कि जमीनों कि सुरक्षा से जुड़े हुए थे। लेकिन तत्कालीन सरकार ने उसमे कुछ संशोधन किया उन्हे उस समय विधानसभा से पास भी करा लिया, लेकिन जब ये कानून द्रौपदी मुर्मू के पास मंजूरी के लिए पहुंची पास कराने के लिए पहुंची तो क्योंकि उस वक्त द्रौपदी मुर्मू जी झारखंड कि राज्यपाल थी तो द्रौपदी मुर्मू ने हस्ताक्षर करने से सीधा मना कर दिया और वापस लौट दिया, उनका कहना था कि ये कानून आदिवासी समुदाय के हित में नहीं है।

लेकिन उस वक्त के मुख्यमंत्री रघुवर दास जी दिल्ली आए और इस कानून को पास करवाने के लिए बहुत दबाव भी बनाए, लेकिन द्रौपदी मुर्मू नहीं मानी और झारखंड में मंजूरी देने से सीधे इनकार कर दिया। साल 2019 में भी द्रौपदी मुर्मू जी पास एक कानून को मंजूरी देने के लिए भेजा लेकिन मंजूरी नहीं मिली।

  • 1997 में पहली बार बीजेपी में शामिल हुई, पार्षद बनी फ़र साल 2000 में रायरंगपुर से विधायक बनी, साल 2000 में उड़ीसा सरकार में मंत्री पद मिला साल 2007 में सर्वश्रेष्ट विधायक का पुरस्कार तक मिला। साल 2009 में दोबारा से रायरंगपुर कि विधायक बनी, और साल 2015 से लेकर 2021 तक झारखंड कि राज्यपाल भी रही और आज भारत देश कि आदिवासी समुदाय कि पहली राष्ट्रपति है और आजाद देश में जन्मी।

द्रौपदी मुर्मू जीवन विस्तार में

उड़ीसा के मयूरभंज में दो मंजिला मकान में 6 कमरे है ये घर वहाँ है जहाँ आम लोग रहते हैं मध्यम वर्ग के लोग ही रहते हैं द्रौपदी मुर्मू भारत देश कि पहली राष्ट्रपति बन गई है जो आजाद भारत के बाद जन्मी है इससे पहले नरेंद्र मोदी जी पहले प्रधानमंत्री है जो आजाद देश के बाद जन्मे हैं। एक समय द्रौपदी मुर्मू जी डिप्रेशन में रही है वर्ष 2009 में उनके बेटे कि 25 साल कि उम्र में आकस्मिक मौत हो गई थी। बेटे कि मौत से द्रौपदी मुर्मू जी को बहुत बड़ा सदमा लगा और डिप्रेशन में चले गए, अपने आप को डिप्रेशन से निकालने के लिए इन्होंने ब्रह्मयकुमारी संस्था से जुड़ गई।

लेकिन फिर 4 साल बाद साल 2013 मे इनके दूसरे पुत्र कि सड़क दुर्घटना में मौत गई।

दूसरे बेटे कि मृत्यु के कुछ दिन के बाद इनके माताजी का निधन हो गया उसके बाद उनके एक भाई का निधन हो गया, ये सब एक महीने सिर्फ हुआ इनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट गया, किसी तरह द्रौपदी मुर्मू जी अपने जीवन को बेहतर बनाने कि कोशिश करती लेकिन बीच में कोई न कोई बाधा आ ही जाता फिर अगले ही साल यानि 2014 में इनके पति श्यामचरण मुर्मू जी कि भी मौत हो गई । ये सब घटित होने के बाद मानो अब उनके जीवन में कुछ बचा ही नहीं कुछ रहा ही नहीं बस उनकी एक बेटी रही ये सब होने के बाद द्रौपदी मुर्मू जी हिम्मत हार चुकी थीजीवन का मानो कोई मकसद ही नहीं रहा।

लेकिन आप को डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए योग करना शुरू किया और ये सब निकालने के बाद साल 2015 में झारखंड कि पहली महिला राज्यपाल नियुक्त हुई, द्रौपदी मुर्मू शुरू से ही सामान्य जीवन व्यतीत करती है और आज भी सरल स्वभाव कि ही है द्रौपदी मुर्मू जी ने कभी राजनीति में आने कि नहीं सोची थी।

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