प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जीवनी, कहानी | Great Prime Minister & Freedom Fighter Lal Bahadur Shastri Biography In Hindi

लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन परिचय

Lal Bahadur Shastri real name लाल बहादुर श्रीवास्तव/वर्मा
School Name लाल बहादुर
Lal Bahadur Shastri birthday 2 अक्टूबर 1904
Lal Bahadur Shastri Birth place मुगलसराय, United Provinces of Agra (वाराणसी, उत्तरप्रदेश)
Lal Bahadur Shastri father name मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव
Lal Bahadur Shastri mother name राम दुलारी देवी
Education ग्रेजुएशन
Lal Bahadur Shastri wife nameललिता शास्त्री
Lal Bahadur Shastri children(6) 2 बेटी 4 बेटे- कुसुम, सुमन, हरीकृष्णा, अनिल सुनील, व अशोक
Politics Party कांग्रेस
Award भारत रत्ना 1966
Lal Bahadur Shastri death date 11 जनवरी 1966
लाल बहादुर शास्त्री पुरानी फोटो

लाल बहादुर शास्त्री जी के नाम तो सभी ने लगभग सुने होंगे और ये भी पता होगा कि ये हमारे देश भारत के प्रधानमंत्री भी रह चुके हैं। लाल बहादुर शास्त्री जी एकमात्र ऐसे प्रधानमंत्री है जो काम इन्होंने किया है अभी तक किसी प्रधानमंत्री और ना ही कोई और मंत्री, नेता ने किया है जिसके बारे मैं आपको आगे बहुत ही बेहतर ढंग से बताऊँगा। लाल बहादुर शास्त्री जिस तरह के दिखते थे जिस तरह के कपड़े पहनते थे तो उस पर कुछ लोग हंसते थे उनका मज़ाक तक उड़ाते थे। बहुत से लोग कहते थे कि क्या ये हमारे देश के प्राइम मिनिस्टर बनेगा, कोई भी इज्जत नहीं करते थे।

लाल बहादुर शास्त्री पुरानी फोटो

लाल बहादुर शास्त्री के रहन सहन और पहनावे पर लोग खूब मज़ाक उड़ाया करते थे। सिनेमा में जब विज्ञापना आता था तब लाल बहादुर शास्त्री जी का भी फोटो आता था तब भी उन्हें देखकर लोग हँसते थे कैबिनेट तक में लोग मजाक उड़ाते थे।जब भी कहीं प्रेस कांफ्रेंस होता तो लोग इनके साथ अच्छे से पेश नहीं आते थे अच्छा व्यवहार नहीं करते थे, जैसे एक गरीब आदमी के साथ कोई व्यवहार करता है उस तरह से पेश आते थे। ज़िन्दगी में लाल बहादुर शास्त्री जी को बहुत बेज्जती सहनी पड़ी और उसने हमेशा सहा और आगे बढ़ते रहे लोगों की नजरो और बातों को किनारे करते हुए।

और जो आज लाल बहादुर शास्त्री जी को दर्जा मिला हुआ है वो किसी को अभी तक नहीं मिला है। लाल बहादुर शास्त्री जी न अपनी एक पहचान बनाई है अपने बल बूते पर शायद ही किसी ने बनाई होगी।

लाल बहादुर शास्त्री पुरानी फोटो

लाल बहादुर शास्त्री का बचपन बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा है इनके पिता टीचर थे, उसके बाद फिर क्लर्क बने। लाल बहादुर शास्त्री मात्र जब 2 से ढाई साल के रहें होंगे उस उम्र में इनके पिता जी की मृत्यु हो गई। उसके बाद तो इनके घर की आर्थिक स्थिति तो बहुत ही खराब हो गई थी। इनके जीवन में बहुत समस्या आ जाती है इनके चाचा पुरे घर की जिम्मेवारी उठाते हैं।

लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म परिवार वा शिक्षा

लाल बहादुर शास्त्री जी का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को मुगलसराय, चंदौली जिला (उत्तरप्रदेश) में एक बेहद ही सामान्य ब्राहमण परिवार में हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री जी के पिताजी का नाम शारदा प्रसाद श्रीवास्तव था जो एक प्राथमिक स्कूल ले अध्यापक थे। लेकिन कुछ समय बाद उनके पिताजी क्लर्क की नौकरी ज्वाइन कर लेते हैं, शास्त्री जी के माताजी का नाम राम दुलारी देवी थी। लाल बहादुर शास्त्री जी घर में सबसे छोटे थे शास्त्री जी उस समय करीब 2 साल के रहे होंगे जब उनके पिताजी की मृत्यु हो गई। घर की परिस्थितियां बेहद ही खराब हो चुकी थी।

शास्त्री जी के पिताजी के निधन के बाद उनकी माँ उसको लेकर उसके नाना के यहां चली गई। लेकिन अफसोस कुछ समय पश्चात शास्त्री जी के नाना जी का भी निधन हो जाता है, उसके बाद छोटे से शास्त्री जी का परवरिश का सारा बोझ उनकी माँ पर आ जाती है और भी बाकी के 5 बच्चे थे, उसके बाद उन सभी बच्चों के भरण पोषण में शास्त्री जी के मौसा जी मदद करते हैं। नाना के घर में रहते हुए शास्त्री जी को प्राथमिक शिक्षा मिली, उसके बाद हरिश्चन्द्र हाई स्कूल और फिर काशी विद्यापीठ से Graduation की और साथ में ही काशी विद्यापीठ से शास्त्री का टाइटल मिला।

1925 में लाल बहादुर शास्त्री जी की ग्रेजुएट पूरी होती है, और इसी विद्यापीठ से ही उनको शास्त्री का टाइटल मिला था। इनका वास्तविक नाम तो पता ही होगा लाल बहादुर श्रीवास्तव था, शास्त्री (Scholer) का मतलब जिसको हर चीज की ज्ञान हो और लाल बहादुर शास्त्री ने इतना पढ़ लिया था की उनको बहुत ज्ञान हो चुका था। उसके बाद लाल बहादुर श्रीवास्तव जी यहीं से अपने नाम से के पीछे शास्त्री लगा लेते है और जब पढ़ रहे थे तब उन्होंने अपना नाम लाल बहादुर श्रीवास्तव से श्रीवास्तव हटा के सिर्फ लाल बहादुर नाम रख लिया था।

लाल बहादुर शास्त्री जी का विवाह ललिता शास्त्री से हुआ था, शास्त्री जी की पत्नी ललिता देवी जी लाल बहादुर शास्त्री जी के क़दम हर जगह हर चीज में सपोर्ट करती थी। कभी भी तेज आवाज नहीं बोलती थी इतनी सरल स्वभाव की थी कि उसका कुछ कहना ही नहीं। भारत की आजादी के आंदोलन में गांधी जी नेहरू जी के साथ लाल बहादुर शास्त्री जी बढ़ चढ़कर भाग लेते थे। उस समय तक लाल बहादुर शास्त्री जी महात्मा गाँधी जी और नेहरु जी के बहुत करीब आ चुके थे और आंदोलन की वजह से शास्त्री जी को कई बार जेल भी जाना पड़ता था।

लाल बहादुर शास्त्री जी की बचपन और अन्य कुछ अनसुनी कहानी

लाल बहादुर शास्त्री जब 8 साल के रहे होंगे एक बार गार्डन में शास्त्री जी बगैर वहां के माली से पूछे फुल तोड़ लेता है। तो वहां के जो माली थे उसने कहा बच्चे तुमने बगैर पूछे फुल क्यों तोड़ा डांटते हुए कहा लाल बहादुर शास्त्री रोने लगते हैं उसके बाद वो माली को थोड़ा दया आ जाती है। और लाल बहादुर शास्त्री को समझाते है कि बगैर किसी से पूछे किसी के भी सामान को छुना नहीं चाहिए। ये बात लाल बहादुर शास्त्री जी के दिमाग में घर कर जाती है, एहसास हो जाता है और इस सीख को शास्त्री जी जीवन भर अपना आधार बनाकर ले के चलते हैं।

सर पर ड्रेस और किताब रखकर नदी पार करके स्कूल जाना

लाल बहादुर शास्त्री जी का बचपन का स्कूल जीवन सबसे ज़्यादा संघर्षपूर्ण रहा है। जब शास्त्री जी स्कूल जाते थे तो नदी पार करके जानी पड़ती थी। उसका स्कूल गंगा पार था आने जाने के लिए उस समय पुल या ब्रिज भी नही हुआ करते थे, नाव से आना-जाना पड़ता था उसके लिए शास्त्री जी के पास पैसे नहीं थे। जो नाविक था वो बहुत दयालू थे और उस बच्चे को देखकर दया आ जाती है और शास्त्री जी से कहते हैं बेटा आकर नाव पर बैठ जाओ मैं तुमसे पैसे नहीं लूँगा। लेकिन लाल बहादुर शास्त्री नहीं बैठते और कहते कि मुझको किसी का एहसान नहीं चाहिए।

क्योंकि ये मेरे वसूलो के खिलाफ है क्योंकि मैं आपका एक सवारी का पैसा मार रहा हूँ एक सवारी की जगह मैं लेकर आपका नुकसान नहीं कर सकता हूँ। और उसके बाद शास्त्री जी अपना ड्रेस और किताबे अपने सर पर रखते और हर रोज नदी खुद से ही पार करके पढ़ने स्कूल जाते थे।

उनके जो टीचर थे निर्मल प्रसाद मिश्रा जी करके जो हेडमास्टर भी थे और इंग्लिश भी पढ़ाते थे। तो एक दिन सबको Assignment दिया, और उस समय लाल बहादुर शास्त्री के पास और कॉपी बुक खरीदने के पैसे तक नहीं थे। तो उनका जो दोस्त होता है उनसे शास्त्री जी किताब उधार लेता है। रात भर मेहनत करते है अगले दिन टेस्ट जो था पूरी बुक को कॉपी में उतारते हैं पूरी रात भर पढाई करते हैं। और अगले दिन क्लास के टेस्ट मे बहुत ही अच्छा प्रदर्शन करते हैं, जिससे अध्यापक बहुत खुश हुए। लेकिन शास्त्री के गलती कर बैठे वो कॉपी घर पर छोड़ दिए थे।

जिससे इंग्लिश के शिक्षक बहुत गुस्सा भी हुए और कहते है अपने जिम्मेवारियों को भी समझो, टीचर ने कहा तुम तो discipline का भी पालन नहीं करते तुम्हे अपना text बुक कैसे भूल सकते हो? जिसके कारण डांट सुननी तो पड़ी ही और साथ में ही थोड़ी बहुत म़ार भी खाई। उसके बाद लाल बहादुर शास्त्री थोड़े बहुत रोते हैं और दुःख भी होता है फिर उसके बाद उसके दोस्त ने मास्टर जी को बताया कि सर वो इतने गरीब हैं कि किताब तक नहीं खरीद सकता है। उसने तो मेरी बुक उधार लेकर अपना assignment बनाया था तैयारी की थी।

ये सब सुनने के बाद उसके इंग्लिश के शिक्षक का दिल पसीज जाता है उसके प्रति प्यार का भावना जाग जाती है। कि कैसे एक छोटा सा बच्चा इतना संघर्ष कर सकता है। उसके बाद उसका शिक्षक छोटे लाल बहादुर शास्त्री जी की मदद करने का फैसला ले लेते हैं और जितना हो सकता था उसने उसकी मदद की। शास्त्री जी की पढाई लिखाई का खर्चा उठाया, और इस तरह दोनों का रिश्ता एक पिता पुत्र जैसा हो गया।

शास्त्री जी को मेला दिखाने के लिए जब इनकी माँ उधार लेती है

लाल बहादुर शास्त्री जब छोटे थे तब इनकी मां शास्त्री जी को मेले में ले जाने के लिए इनकी माँ किसी से कुछ पैसे उधार लेती है। जब लाल बहादुर शास्त्री ये सब चीजे देखी तो शास्त्री जी मेला जाने से इंकार करे देते हैं। और मेला नहीं जाते हैं और शास्त्री जी अपनी माँ से कहती है कि मुझे ये उधार के पैसे से मेले नहीं घुरना है। जब हम लोग खुद से पैसा कमाने लगेंगे तो फिर मेला देखने जाएंगे, आप यहां देख सकते हैं कि लाल बहादुर शास्त्री जी बचपन में ही कितने समझदार हो गए थे जिसकी कल्पना भी कोई नहीं कर सकता है कैसे एक सिख को अपने जीवन का आधार बना लिया।

शास्त्री जी के घर में किसी को टायफायड हो गया था, तब वो वहाँ से खबर लेते रहते थे घर में सब कुछ ठीक है ना एक एक चीज के बारे में पूछते थे। बच्चे ठीक है की नही और जब उनके घर में किसी भी तरह की छोटी मोटी समस्या आती थी तो उनकी पत्नी भी इतनी समझदार थी कि वो खुद उसे ठीक करने की कोशिश करती और शास्त्री के सामने जाहिर तक नहीं होने देती थी। एक बार क्या होता है की लाला लाजपत राय सर्वेंटस ऑफ पीपुल्स सोसिटी का गठन किया जिसमे शास्त्री जी को इसका लीडर बना दिया जिससे लाल बहादुर शास्त्री को 50 रुपये मिलते थे।

वो पूरे 50 रुपये तो लाल बहादुर शास्त्री घर में दे दिया करते थे, और अपनी बीबी से एक दिन पूछा कि जो मैं 50 रुपये तुम्हे भेजता हूँ वो काफी है या फिर और ज्यादा की दरकार है उससे काम चल जाता है कि नहीं। तो इसमें उसकी बीबी कहती है की जो तुम 50 रुपये भेजते हो और ज्यादा ही हो जाता है, उसकी बीबी हो सकता है झूट भी बोल रही होगी तो शास्त्री जी मैं तो घर का सारा खर्चा 40 रुपये में ही पूरा कर लेती हूँ और दस रुपये बच ही जाती है। तो यहाँ शास्त्री जी सर्वेंटस ऑफ पीपुल्स कमेटी के हेड से कहा की आप मुझे 40 रुपये दिया करे।

और 10 रुपये उनको दे दीजिए जो सर्वेंट है जिसकी स्थिति बेहद ही ख़राब है, इससे पता चलता है कि लाल बहादुर शास्त्री लोगो के हित में कितन दूर तक सोचते है। आज के वक्त में ऐसा नेता पैदा होना और बनना ही बंद हो गया है, आज ऐसा कोई नेता हो तो बताये मुझको करोड़ो रुपये कब खा जाते हैं और डकार तक नहीं लेता है पता तक नहीं चलने देते हैं।

एक बार क्या हुआ है की लाल बहादुर शास्त्री जी का बेटा अनिल शास्त्री किसी नौकर को बेवजह खरी खोटी सुना देते हैं। और बेइजती कर देता है उस वक्त लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री के पद पर थे और जब ये बात शास्त्री जी को पता चली तो उसने तुरंत अपने बेटे अनिल शास्त्री को बुलाया और उससे माफ़ी मांगने को कहा और माफ़ी मंगवाई तुमने उसके साथ गलत किया है। लेकिन आज के छोटे नेता का जो बेटा है वो तो खुद को अपने आप को प्रधानमंत्री ही समझ बैठता है और गलती भी करता है और किसी को सीधा बर्खास्त भी करवा देता है।

नेहरु जी – लाल बहादुर शास्त्री और नेहरु जी का रिश्ता बहुत मजाकिया किस्म का रहता था उन दोनों में खूब मजाक हुआ करता था जब नेहरु जी को मौका मिलता था लाल बहादुर शास्त्री को नेहरु जी नही छोड़ते थे एक बार कांग्रेस कैबिनेट की पार्टी हो रही होती है जब पार्टी खत्म होती है तो नेहरु जी चुपके से table से 2 समोसा उठाते हैं और लाल बहादुर शास्त्री के जेब में रख देते हैं उअर उसके बाद मजाक में जोर से साथियो के बीच कहते हैं देखो देखी भैया लाल बहादुर शास्त्री जी पेट नहीं भरा है

वो 2 समोसा ले जा रहे हैं तो इसमें लाल बहादुर शास्त्री हु नेहर जी की ले लेते है और कहते है है की हम हौर नेहर जी एक साथ एक ही कार में जायेंगे और हम और नेहरु जी दोनों साथ में ही तो पार्टी करेंगे कार में सब वहन खूब हँसते हैं और कहा की अगर हम दोनों ने समोसा नहीं खाया तो हमारा ड्राईवर खा लेगा उसके बाद नेहरु जी बहुत खुस होते हैं

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